हरी पतग और लाल दुपट्टा : Long Hindi Story
Best Motivational Hindi Story दीदीजी , मुझे पतंग उड़ाना नहीं आता। आप प्लीज इस पतंग को उड़ाकर मेरी मां तक पहुचा देना। सब कहते है कि मरने के बाद लोग ऊँपर दूर आसमान में चले जाते है। मां भी तो वहीं होगी ना। आप बस उन तक ये पतंग पहुचा देना। पतगों का मोसम आ चुका था। आकाश में लाल , नीली , पीली , हरी , नारगी ढेर सारे रगों की पतगेंउड़ते हुए ऐसे लग रही थी , मानो इन्द्रधनुष के सारे रग आकर आकाश मेंबिखर गए हो। जिनकी सोहबत में सारा आकाश खिलखिलाता सा नजर आ रहा था।रेवड़ी , तिलपट्टी , मूगफली और तिल के लड्डूएक थाली में लेकर मैंभी पहुच गई छत परपड़ोस के बच्चों के सग पतग उड़ाने। तभी छतसे नीचे सड़क किनारे कई दिनोंबाद एक चबूतरे पर बैठी रेवती नजर आई। बड़ी उम्मीदभरी नजरोंसे कभी वो आकाश में उड़ती पतगो को देखती तो कभी मायूस होकर शून्य मेंताकने लगती। रेवती घर से थोड़ी दूर बने आधे कच्चे आधे पक्के घर में रहती थी। कुछ महीनों पहले तक तो , जब उसकी मांझोड़ू-बत ¸ न करनेआती , अक्सर उसका घर में आना-जाना होताथा। पर पिछले महीने ही उसकी मांचल बसी।आसपास के लोग बताते हैंकि एक रात उसकेशराबी पति ने उसे प...