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सूर्य सबसे पहले कौनसे देश से निकलता है?

सूर्य सबसे पहले दुनिया के किस देशमें निकलता है? इस सवाल का जवाब समझना आसाननहीं है, क्योंकि धैरती घूमती रहती है।इसलिए सबसे पहले कौनसा इलाका सूर्यके सामने आता है, यह कह पाना मुश्किलहै। बहरहाल मनुष्य ने धैरती को अक्षांश,देशांतर के मार्फत विभाजित किया है। साथही पूवर्, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण चारदिशाएं भी तय की हैं। धैरती के गोले परउत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक जो काल्पनिकदेशांतर रेखाएं हैं, उनमें जो देश सुदूर पूवर्में 180 देशांतर पर पड़ेंगे, वहां सबसे पहलेसूर्योदय मानना चाहिए। दुनिया को अलग-अलग टाइम जोन में विभाजित किया गयाहै। इस टाइम जोन से तय होता है कि सबसेपहले सूर्योदय किस देश में होता है।सामान्यत: हम मानते हैं कि दुनिया में जापानका मिनामी तोरीशीमा धैुर पूवर् में है। इसलिएवहां सबसे पहले सूर्योदय मान सकते हैं।दूसरा तरीका यह है कि डेटलाइन को आधारमानें। ग्रीनविच मीन टाइम को यदि आधारमानते हैं तो जापान के समय में नौ घंटेजोड़ने होंगे यानी जब ग्रीनविच मीन टाइमशून्य यानी रात के बारह बजे होंगे तो जापानमें सुबह के नौ बजे होंगे। वास्तव में जीएमटीसे सिर्फ बारह घंटे का फर्क फिजी, तुवालू,न्यूज...

अच्छे CEO में होते हैं ये खास गुण

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Best CEO किसी कंपनी के असरदार मुक्य कार्यकारी अधिकारी ( CEO ) बनना चाहते हैं तो खास गुणों को अपनाएं। खुला दिमाग समें कोई शक नहीं है कि आप योग्य और सक्षम हैं , लेकिन यदि आप यह सोचते हैं कि आपके पास हर सवाल का जवाब मौजूद है तो परेशानी खड़ी हो सकती है। आप अपनी टीम पर रौब दिखा सकते हैं , बिना किसी से पूछे निर्णय ले सकते हैं और पूरी ताकत अपनी मुटठी में रख सकते हैं , पर इससे टीम के लोग दूर होते चले जाएंगे। रिजल्टस के लिए पूरी टीम पर निभर्र रहना है। इसलिए दिमाग खुला रखें।इ सही कल्चर का निमार्ण फल CEO बनने के लिए हर लेवल पर शानदार टीक्स की जरुरत पड़ती है। आपको वर्कप्लेस पर ऐसा कल्चर विकसित करना चाहिए , जहां हर कोई अपनी बात ईमानदारी से कह सके। ज्यादातर CEO को हर बात में हां पसंद होती है। यह स्थिति कंपनी के लिए अच्छी नहीं होती। अच्छे CEO डिसीजन मेकींग में विविधता के महत्व को जानते हैं। वे विरोध के बारे में विचार करते हैं और सही बात का सम्मान करते हैं। समस्या पर सही तरह से विचार अगर CEO किसी निर्णय पर पहुंचने के लिए अपने पुराने अनुभवों का जरुरत से ज्यादा इस्तेमाल क...

आपको हर दिन क्या खाना चाहिए

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मनुष्य के लिए प्रतिदिन पौषक तत्वों की आवश्यकता -  कैलोरी: 3000 प्रोटीन: 70 ग्राम कैल्शियम: 0.8 ग्राम लौह: 12 मिली ग्राम आयोडीन: 0.1 मिली ग्राम विटामिन ‘ ए ’: 5000 अन्तर्राष्ट्रीय ईकाई (I.U) विटामिन ‘ बी ’: 1.8 मिली ग्राम विटामिन ‘ सी ’: 7.5 मिली ग्राम निकोटीन अम्ल: 12 मिली ग्राम पोटेशियम: 3 ग्राम मैग्नीशियम: 0.35 ग्राम तांबा: 2 मिली ग्राम मैगनीज: 15 मिली ग्राम

पौध लगाने का उत्तम समय : Kheti Tips

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प्याज की खेती ,  टमाटर की खेती कैसे करें? ,   फूलगोभी की खेती फलों के पौधे लगाने का उत्तम समय वर्षा ऋतु है अर्थात् जुलाई , अगस्त , सितम्बर। पौधे वर्षा ऋतुके आरम्भ में ही लगा देने चाहिए। वर्षा ऋतु में लगाए गए पौधे वायुमण्डल में नमी अधिक होने से शीघ्र हीलग जाते है। इसके साथ ही सिंचाई की भी वर्षा में आवश्यकता नहीं होती है। इन महीनों में वृक्षारोपण ऐसेस्थानों में किया जा सकता है जहाँ पर अधिक वर्षा के कारण भूमि से जल-निकास ठीक से नहीं हो पाताऔर वर्षा ऋतु में लगाए गए पौधे सड़ जाते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में पौधे बसन्त ऋतु अथवा फरवरी-मार्च में हीलगाए जाते हैं।रोपण फलक या प्लांटिंग बोर्ड का उपयोग पौधा लगाने के लिए किया जाता है। प्लांटिंग बोर्ड या   रोपण फलक 1.5 मी. लम्बा , 1.5 सेमी चैड़ा और 2.5 सेमी. मोटा लकड़ी का तख्ता होता है , जिसके मध्य भाग में और दोनों सिरों पर कोण के आकार के कटाव होते है। लकड़ी सीधी और मजबूत होनी चाहिए।

उच्च तकनीकी से पौधे कब व कैसे लगाये

पौधा लगाने की विधि: 1) पौधा गड्ढे में उतनी गहराई में लगाना चाहिए जितनी गहराई तक वह नर्सरी या गमले में या पोलीथीन की थैली में था। अधिक गहराई में लगाने से तने को हानि पहुँचती है और कम गहराई में लगाने से जड़े मिट्टी के बाहर जाती है , जिससे उनको क्षति पहुँचती है। 2) पौधा लगाने के पूर्व उसकी अधिकांश पत्तियों को तोड़ देना चाहिए लेकिन ऊपरी भाग की चार-पांच पत्तियाँ लगी रहने देना चाहिए। पौधों में अधिक पत्तियाँ रहने से वाष्पोत्सर्जन ( Transpiration) अधिक होता है अर्थात् पानी अधिक उड़ता है। पौधा उतने परिमाण में भूमि से पानी नहीं खींच पाता क्योंकि जड़े क्रियाशील नहीं हो पाती है। अतः पौधे के अन्दर जल की कमी हो जाती है और पौधा मर भी सकता है। 3) पौधे का कलम किया हुआ स्थान अर्थात् मूलवृन्त और सांकुर डाली या मिलन बिन्दु (Graft Union) भूमि से ऊपर रहना चाहिए। इसके मिट्टी में दब जाने से वह स्थान सड़ने लग जाता है और पौधा मर सकता है। 4) जोड़ की दिशा दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर रहना चाहिए। ऐसा करने से तेज हवा से जोड़ टूटता नहीं है। 5) पौधा लगाने के पश्चात् उसके आस-पास की मिट्टी अच्छी तरह...

अरहर की खेती : किस्में, संकर, सिंचाई, बीज और रोग

दोस्तों आज मैं आप के साथ अरहर की खेती(arhar ki daal)  कैसे करे इसके बारे बहुत ही ज्यादा विस्तार से जानकारी शेयर कर रहा हु आप इस लेख में निम् टॉपिक को पढेंगे - अरहर का उत्पादन संकर तकनीकी अरहर में संकर प्रजातियों की संभावनायें - आनुवांशिक नरबंध्यता पर आधारित अरहर की संकर प्रजातियों का विकास अरहर में संकर बीजोत्पादन की तकनीकी नरबन्ध्य जनक का बीजोत्पादन: Arhar ki kheti   सस्य क्रियायें अन्तराल सस्य क्रियायें: सिंचाई: फसल सुरक्षा: अवांछित पौधों की छटनी: फलियों की तुड़ाई: पेड़ी: बीज की उपज: परागणकर्ता (पोलीनेटर) जनक का बीजोत्पादन: संकर बीजोत्पादन अरहर की किस्में: फली मक्खी (मेलोनाग्रोमाइजा आब्टूसा) - फली छेदक (हेलिकोवर्पा आर्मिजेरा) - फली तितली (लैक्पिडिस बोइटिकस) पत्ती मोड़क (ग्रेफोलिटा क्रिटिका) फली बग (क्लेविग्रेला जिबोसा) - घुन (कैलोसोब्रुकस स्पीसीज) फसल को कैसे बचायें ? निबौली सत का प्रयोग एकीकृत कीट नियंत्रण अरहर की खेती भारत में तीन हजार...